मुख्तार अहमद का सफ़र-ए-हयात | The Life Journey of Mukhtar Ahmed
28 फरवरी 1935 को जगत संभल के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में लकड़ी के व्यवसाय करने वाले हाजी खालिक अहमद की पत्नी अप्सरी पैट के कोख से एक बच्चे का जन्म हुआ। जिसका नाम बड़े हसरतों से मुख्तार अहमद रखा गया। मुखिया जी अहमद ने पांचवी तक की तालीम सब्जी मंडी प्राइमरी स्कूल की जिम्मेदारी आपको सौंपी है। उसके बाद इंटरनैशनल तक हिंद कॉलेज संभल से आप पढ़ाई के शौक पर चढ़ते रहे। आपने आगे की पढ़ाई के लिए 1954 में क्रिएटर मुस्लिम यूनिवर्सिटी में तैयारी कर ली। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद एम-ए एल-बी की तालीम हासिल की। 1962 में आपने आज़ादी के लिए अभियान शुरू किया, आपके सफ़ीक़ी ख़ान ने सबसे पहले वकील का पद हासिल किया और समाज से जुड़कर समाज के लिए काम करने लगे। जैसे-तैसे अपने समाज के लिए कुछ करने का जज्बा दिया, इसी फिक्र की बदोलत एक तंजीम जमाते सोफिया वजूद में आई। सैफी समाज को सैफी सरनेम देने वाली तन्जीम ने आपको सैफीया तन्जीम का सबसे पहला जर्नल कंसल्टेंट बनाया है। जमते सोफिया का दस्तूर आपने ही तय किया था, नमूने के तौर पर सभी लोगों ने बाजी मारी और मान लिया कि आपके सर पर स्लेअम के वास्ते खिदमत से कुछ कर अनाज का...