चराग-ए-अंजुमन
आज हम एक ऐसे शायर के बारे में लिख रहे हैं, जो जन्मजात हिमाचल प्रदेश के एक शहर में हुई छोटी सी दुनिया-ए-अदब शाहिद अंजुम के नाम से जानी और पहचानी जाती है। मैं देखता हूँ कि बुरे लोग बड़ों से ताजीमी गुफ्तगू और छोटों से शफकत पेश आते हैं, जाने अनजाने सभी लोगों को इज्जत देते हैं। दोस्तों की अजमतों का ख़याल रखते हैं और मृतकों का शुक्रिया अदा करते हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि उनकी शख्सियत में निखार आए।
शाहिद अंजुम की शायरी सुनकर लगा कि मेरे ख्यालात का इजहार, शाहिद अंजुम की शायरी में मुझे समाज के हर वर्ग का रिकॉर्ड महसूस होता है। शाहिद अंजुम ने अपने शेरों के मायने समाज के हर वर्ग तक पहुंचने की कोशिश की है। तमाशा दिखाने वाले से लेकर बादशाहों तक को अपनी शायरी की माला में पिरो लिया है। ऐसी शायरी का करना आसान नहीं होता जब तक कि वो कैफियत आपके दिल पर न गुज़रे जिस कैफियत के आप शेर कह रहे हों। मुझे लगता है कि जब शाहिद अंजुम शेर कहते हैं, तो आप को इस करतब में महसूस होता है, इस हालत को वज्द कहा जाता है और वज्द का कोई मरहला नहीं होता सामने आपकी शायरी सुनकर वाह-वाह होते हैं, तो दूसरी तरफ शायर भी आपको दादो तहसीन से नवाज़ते हैं।
आपकी शायरी में वो जुल्फों के पीछे खम, वो आशिक की दीवानगी, वो महबूबा की लड़ाई में ज़मीनों आसमान एक करने से ज्यादा समाज को हकीकत का खुलासा पर जोर है। ऐसा नहीं है कि आप मोहब्बत की नहीं होगी लेकिन आपके मोहब्बत वतन से ज्यादा दिखाई देती है। जिसका असर आपके शेरों में आता है, आपकी ख्वाहिशों का असर होता है। लेकिन आपकी फ़िक्र का भी कोई मुकदमा नहीं है। आपके शेर को मरहूम मुनव्वर राणा ने कई मर्तबा नक्ल किया है। आपके शोहरतो की गूंज सरहद से बाहर भी सुनाई देती है, डायलॉग चैनल ने आप की शोहरतों को सरहदों के बाहर दिखाया है। आपके अशरफ फाइलों को पहियों और मकानों की दीवारों पर पाकिस्तानियों ने लिखा है, आपका जुदा रंग जुड़ा लहजा आवाम में मकबूल है। लोगों के दिल पर जो शेर ज्यादा असर करते हैं, मैं उन शेरों को यहाँ नाकाम कर रहा हूँ आप इन शेरों से खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि शाहिद अंजुम की शायरी किस हद तक असरदार है।
मुखालिफ़ीन को मेरे पनाह देते रहो
तलाश रहो दुबई की तरह-
मैं तल्लुकात के जंगल में नीलाम हुआ हूँ
मुझे तो गांव का साधु भी मार सकता है-
मेरा उतरा हुआ चेहरा बहुत नुकसान पहुंचाता है
मैं जब मायुस होता हूँ तो बच्चे टूट जाते हैं।
हम उस सीज़न में भी दिखते हैं तुम्हारे साथ रहते हैं
कि जिस सीजन में लाइव को छोड़ देते हैं
ऐसी ही एक कहानी का किरदार हूँ मैं
जिसका हर चरित्र पागल होना है।
बीवी बच्चे ढोल बजाते रहते हैं
नट रस्सी के ऊपर चलता रहता है।
झूठे बर्तन उंगली में रहते हैं
ढाबे में भी बचपन पलटा रहता है।
दुर्भाग्यशाली बच्चे मक़तल में कट जाते हैं
गाय के थन से दूध निरन्तर रहता है।
पहले लुटे थे कायदे आजम के नाम पर
इस बार साधुओं की कयादत में लुट गए।
जहाँ से अमन के पंछी उड़ान भरते हैं
उसी दरख्त के पत्ते लगाते रहते हैं।
मुद्दतों बाद तेरे लम्स का संदल महका
मुद्दतों बाद मेरे जिस्म से खुशबू आई।
घर से भीगी आंखें लेकर निकला था
पाछे पंछी झील समझ कर बैठ गये।
दिल के टुकड़े कौन उठाता है
आओ रेल के नीचे कट कर देते हैं।
छत पर तपती धूप में बैठा रहता था
पहाड़ों तेरा रास्ता तकता रहता था
जब तक एक दूजे को देख न लेते थे
आँखों में सन्नाटा पसरा रहता था
वो भी क्या दिन थे जब तेरी खुशबू से
मेरा पूरा कमरा महक रहता था।
असलम जावेद द्वारा लेख वापसी
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