मलिकजादा जावेद: एक साहित्यकार की बेबाक कहानी और शायरी की दुनिया | Malikzada Javed: A writer's candid story and his world of poetry

मलिकजादा जावेद का साक्षात्कार


एक साहित्यिक व्यक्तित्व की जीवन यात्रा असलम जावेद द्वारा लिए गए इस विशेष साक्षात्कार में मलिकजादा जावेद (दानिश महमूद) ने अपने जीवन, साहित्य और व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला है।



पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा


मलिकजादा जावेद प्रसिद्ध साहित्यकार मलिकजादा मंजूर साहब के पुत्र हैं। उनका जन्म आजमगढ़ में हुआ, जहां उनके पिता शिवली पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में अंग्रेजी के प्राध्यापक थे। उनका मूल निवास भिदौड़ गांव में है, जो किशौछा शरीफ और हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर शमनानी की दरगाह के निकट स्थित है।


पिता का साहित्यिक योगदान


उनके पिता मलिकजादा मंजूर साहब तीन विषयों में एम ए और पीएचडी थे। फिराग गोरखपुरी की सलाह पर उन्होंने उर्दू में  मौलाना अबुल कलाम आजाद पर हिंदुस्तान में पहली पीएचडी प्राप्त की। बाद में वे लखनऊ विश्वविद्यालय में उर्दू विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष बने।


शायरी की शुरुआत और प्रेरणा


साहित्यिक माहौल मलिकजादा जावेद के घर में बड़े-बड़े शायरों का आना-जाना था। फिराग गोरखपुरी, कैफी आजमी, बशीर बद्र जैसे दिग्गज शायर नियमित रूप से आते रहते थे। इस साहित्यिक वातावरण ने उन्हें शायरी की ओर प्रेरित किया।


पहला शेर

उनका पहला शेर कॉलेज के दौरान लिखा गया था:


"तालिब इल्म हूं उर्दू का खता मेरी है,

नौकरी अब किसी सूरत नहीं मिलने वाली"


व्यावसायिक जीवन और सामाजिक सेवा



सरकारी सेवा


मलिकजादा जावेद ने अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम में डिवीजनल ऑफिसर के रूप में कार्य किया। उनका कार्यक्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ मंडल था। वे अपने कर्मचारियों के प्रति उदार व्यवहार के लिए जाने जाते थे और अपनी तनख्वाह का हिस्सा उनकी सहायता में खर्च करते थे।



सामाजिक योगदान


कोरोना काल के दौरान उन्होंने एक अनूठी पहल की और 203 शायरों पर एक-एक घंटे के कार्यक्रम तैयार किए । इन कार्यक्रमों की विशेषता ये थी कि उन्होंने केवल शायरों की अच्छाइयों पर ही फोकस किया, किसी की निजी कमियों का जिक्र नहीं किया।


शायरी का दर्शन और शैली


भाषा और शिल्प


बशीर बद्र साहब की सलाह पर आप ने अपनी शायरी में आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है। उनका मानना है कि शायरी ऐसी होनी चाहिए जो आवाम की समझ में आए।


चुनिंदा शेर


उनके कुछ प्रसिद्ध अशार:


"उससे मिलना जारी है, एक नश्शा सा तारी है,

कुदरत के कुछ रंगों से, तितली पर फनकारी है"


"मत रख लोगों से उम्मीदें, 

  खुद से सबकी यारी है"


"उठाओ कैमरा, तस्वीर खींच लो इनकी,

उदास लोग कहां रोज रोज मुस्कुराते हैं"


व्यक्तित्व और जीवन मूल्य


सकारात्मक दृष्टिकोण


मलिकजादा जावेद की सबसे बड़ी विशेषता उनका सकारात्मक दृष्टिकोण है। वे हर व्यक्ति की अच्छाइयों पर ध्यान देते हैं और दोस्त-दुश्मन से समान व्यवहार करते हैं।


स्वावलंबन का सिद्धांत


उनके पिता ने उन्हें सिखाया था कि अपनी काबिलियत से आगे बढ़ना चाहिए। पिता से विरासत में मिले सिद्धांत का जीवन भर पालन किया।अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं और सम्मान विदेशी मुशायरे मलिकजादा जावेद को संयुक्त अमेरिका, गल्फ  सहित दुनिया के दर्जन भर देशो में मुशायरों के लिए आमंत्रित किया गया है। उनकी एक दिलचस्प यात्रा जद्दा में हुई जहां उन्हें उमरा करने का सर्फ हासिल हुआ।


आने वाली पीढ़ी के लिए संदेश


साक्षात्कार  में मलिकजादा जावेद ने आने वाली पीढ़ी को महत्वपूर्ण संदेश दिया: "कभी किसी सहारे की तलाश न करें। अपने अंदर खुद इतनी काबिलियत पैदा करें कि लोग आपकी तरफ मुतवज्जह हों"।


निष्कर्ष


ये साक्षात्कार एक ऐसे व्यक्तित्व की झलक प्रस्तुत करता है जिसने साहित्य, सेवा और सकारात्मकता के माध्यम से समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मलिकजादा जावेद का जीवन इस बात का प्रमाण है कि वास्तविक सफलता काबिलियत, मेहनत और सकारात्मक दृष्टिकोण से ही प्राप्त होती है।


असलम जावेद की भूमिका


असलम जावेद ने मलिकजादा जावेद के इस खास साक्षात्कार में भूमिका निभाते हुए एक संवेदनशील और सम्मानजनक मंच प्रदान किया।


उन्होंने बातचीत को सहज और गहराई से पूरा करते हुए Malikzada Javed के जीवन, उनके साहित्यिक सफ़र, परिवार और सामाजिक योगदान के विविध पहलुओं को खूबसूरती से सामने रखा। असलम जावेद ने न केवल सवालों के ज़रिये Malikzada Javed की कहानी समझाई, बल्कि उनकी सोच और भावना को भी बखूबी दर्शाया।

उनकी भूमिका में तटस्थता और संवेदनशीलता दोनों थे, जिससे Malikzada Javed खुलकर अपने अनुभव साझा कर सके। उन्होंने साक्षात्कार को संवादात्मक और रोचक बनाए रखा, जिससे श्रोताओं को साहित्य और शायरी की गहराइयों का एहसास हुआ। असलम जावेद की बातचीत की कला और समझ ने पूरे साक्षात्कार को हरियाली और जीवंतता दी, जो दर्शाती है कि वे एक कुशल एंकर के साथ एक संवेदनशील साहित्य प्रेमी भी हैं।


by Sunaina









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