असलम जावेद चैनल | Aslam Javed Channel

असलम जावेद चैनल | Aslam Javed Channel 

साहित्यकार की प्रसिद्धि के लिए आवश्यक है कि साहित्य समाज के पाठक तक पहुँच जाए। लगभग बीस वर्ष पहले तक साहित्य केवल उन्हीं पाठको तक पहुँच पाता था जो पढ़ाई-लिखाई करते थे, लेकिन वर्तमान में साहित्य समाज तक पहुँचना बहुत ही आसान हो गया है। पिछले कुछ सालो में आई क्रांति के कारण घर-घर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है परिणाम स्वरूप अधिक से अधिक लोग शोशल मीडिया पर मौजूद हैं या शोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं।



कॉरोना काल के बाद शोशल मीडिया सबके जीवन का आवश्यक हिस्सा बन गया है। इसे अवसर के रूप में स्वीकार करते हुए असलम जावेद जी ने असलम जावेद चैनल की शुरूआत की है। वर्तमान के साहित्यकार कवि सम्मेल या मुशायरें के माध्यम से अपनी रचनाएँ समाज के सामने प्रस्तुत करते हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि कवि सम्मेलन या मुशायरें में लोगों की संख्या सीमित होती है जिस कारण साहित्यकार की रचनाएँ भी सीमित लोगों तक पहुँचती हैं लेकिन असलम जावेद चैनल के माध्यम से साहित्यकार को समाज के सामने लाये जाने की शुरूआत की है।

कवि सम्मेल व मुशायरें के कार्यक्रम को असलम जावेद चैनल पर प्रसारित किया जाता है। प्रसारण के माध्यम से साहित्यकार की रचना साहित्कार से सुनने की सुविधा समाज के पाठक व दर्शक को मिल जाती है। असलम जावेद जी का कहना है कि यह चैनल सिर्फ एक या दो भाषा को प्रमोट नहीं करेगा बल्कि भारत की सभी भाषओ को प्रमोट किया जायेगा अर्थात प्रत्येक भाषा के साहित्यकारो को इस चैनल के माध्यम से समाज के सामने लाया जायेगा। वह साहित्यकार जिन्हें भारत के नगरिक जानते हैं और वह साहित्यकार भी जिन्हें अब तक लोग नहीं जानते हैं या उनकी रचना पाठकों तक नहीं पहुँची है।

असलम जावेद चैनल के ड्रिस्क्रिप्शन में असलम जावेद जी ने चैनल से सबंन्धित अपने विचार व उद्देश्य व्यकत किए हैं जो इस प्रकार हैं - मैंने यह चैनल भारतीय संस्कृति बचाने के लिए व साहित्य को नए आयाम देने के लिए और साहित्य के नए पुराने चराग की हिफ़ाज़त करने के लिए शुरू किया है।

मेरा सबसे बड़ा मक़सद भारत की तमाम भाषाओं की हिफ़ाज़त करना है। भारत की हर भाषा को ज़िंदा रखने के लिए हर भाषा के साहित्यकार को समाज के सामने लाने का निश्चय किया है। साहित्यकार मात्र शहरों में ही नहीं रहते बल्कि छोटे शहर व गांव में भी मौजूद हैं लेकिन उनकी परस्थितियां शहरों तक उन्हें पहुँचने नहीं देती। जो शायर के गुरु होते हैं वह हमेशा गुमनाम ही रह जाते हैंजो बड़े-बड़े शायर को तराशते हैं। मैंने यह फ़ैसला किया है कि मैं स्वयं उनके शहर गांव जाकर उनसे मिलकर उनके साहित्य को ऑनलाइन के माध्यम से पूरे देश व दुनिया के सामने लेकर आऊंगा

By Sunaina


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

असलम जावेद की कलम से - सैफी डे

मलिकजादा जावेद: एक साहित्यकार की बेबाक कहानी और शायरी की दुनिया | Malikzada Javed: A writer's candid story and his world of poetry

मुख्तार अहमद का सफ़र-ए-हयात | The Life Journey of Mukhtar Ahmed