अकबर का राजनीतिक परिचय | Political Introduction of Akbar
अकबर, जिसे अकबर महमूद जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर भी कहा जाता है, मुगल साम्राज्य का तीसरा शासक था। वह 1556 से 1605 तक शासन करता था और भारत के इतिहास में एक बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति माना जाता है। वह एक बहुत बुद्धिमान शासक था जो भारत के विभिन्न भागों में अपना साम्राज्य फैलाने में सक्षम था। अकबर ने अपनी सरकार को धर्म और संस्कृति के आधार पर स्थापित किया और उसने धर्म और जाति के बिना सभी लोगों को समानता दी।
अकबर ने एक महान धर्म नीति अपनाई जिसे सुलह-कुल (सल्तनत के दिल में राजा) कहा जाता है। इस नीति के अनुसार, उन्होंने सभी धर्मों को समानता के साथ समझा और धार्मिक विवादों को समाप्त करने के लिए कई उपाय अपनाए। अकबर ने अपने दरबार में सभी धर्मों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया और उनसे समानता के साथ व्यवहार किया। उन्होंने सूफी, हिंदू और अन्य धर्मों के धार्मिक विचारों को समझने का प्रयास किया और अपने नियमों में इस विविधता को शामिल किया। अकबर के समय में धर्मीय सहिष्णुता की एक उच्च श्रेणी का विकास हुआ जो भारत के इतिहास में अनुपम है।
जी हाँ, अकबर के समय में धर्मीय सहिष्णुता का विकास एक अनुपम घटना थी। अकबर की सुलह-कुल नीति द्वारा सभी धर्मों को समानता के साथ समझने की पहल ने एक सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत की थी। इसके परिणामस्वरूप, अकबर के समय में धर्मों के बीच सहिष्णुता और समझौते का एक माहौल बना। अकबर ने भी सती प्रथा को रोकने जैसी कुछ महत्वपूर्ण सुधार किए जो उस समय भारतीय समाज के लिए अनुपम थे।
अकबर के समय में संगीत, कला, साहित्य और शिल्प में भी एक उच्चतम स्तर प्राप्त हुआ। अकबर का समय भारतीय संस्कृति और इतिहास के लिए एक स्वर्णिम अध्याय है। अकबर ने अपने समय में चार मुख्य धर्मों को सम्मिलित किया था, जिन्हें हिन्दूधर्म, इस्लाम, बौद्ध धर्म और जैन धर्म कहा जाता है।
अकबर ने दीन-ए-इलाही नामक एक धर्म की शुरुआत की थी। इसे अकबर का खुद का धर्म भी कहा जाता है। यह धर्म अकबर के शासनकाल में विकसित किया गया था और इसमें इस्लाम, हिंदूधर्म, जैन धर्म, सिख धर्म और च्रिस्ती धर्म आदि के तत्त्व शामिल थे।
अकबर का मकसद इस धर्म को समाज को एकता और समझौते का संदेश देने के लिए था। हालांकि, इस धर्म की सफलता उस समय नहीं हुई थी और इसे कुछ वर्षों बाद अकबर के निधन के बाद छोड़ दिया गया था। यह धर्म आज भी विवादित है और इसके बारे में अलग-अलग मत हैं।
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By Aslam Javed
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